Buddhayaana

A New Theravada Buddhist School

Teacher: Prabhat Kumar

Date: 04/06/2016

Overview & Purpose

These are new Theravada Buddhism lessons, devoted towards pure BUDDHISM.......FOLLOW BUDDHA STRICTLY and NOT JUST BOOKS. So, it includes practices which we can do in our daily lives. Everyone can do them.

Educational Suttas

  1. Learn to look like Buddha and meditate under Trees only
  2. Practice fasting like Buddha [for all (SarvaDhamma Pitaka)/for bhikkhus (SanghaSutta Pitaka)]
  3. Learn basic attitudes before looking like Buddha.(four pillars of Vows)

Objectives

  1. To attain Buddha consciousness.Salvation inside Buddha. Enlightenment inside Buddha.
  2. To build Buddha attitude in you, MUT & LLB, Meditate Under Tree & Look like Buddha
  3. Nibbana through Buddha

Materials Needed

  1. Six flower pots/ vase with soil and real flowers/plants.
  2. A peaceful separate room with no upcoming disturbances. In Early morning before sunrise.
  3. A maroon dress like bhikkhus
  4. Buddhist chant book/your hieroglyphs notebook.
  5. BLB&LLB kits
  6. One day fast in a week (Thursday) No salt, no cooked food, yellow fruits.

5 perfections

Nature/Earth/Air tests your understanding so, you will need to

 

Bhikkhus have difficult kriyas for all the above 5 suttas.

 

 

 

Activity

Practices that will reinforce four pillars/Vows

Get up Early, Bring in six vase/pots,  prepare to avoid prospective disturbances, chant suttas while BLB,  do meditation, bow to Celestial Buddha, chant suttas again.

 

 

Four pillars/Vows…(Need to concentrate on these images)

 

¶ तथागत बुद्ध का मन से ध्यान करो तो लगेगा कि तुम श्रद्धा से भरे हुए हो, और बुद्ध पर असीम विशवास है,
तुम अपनी बैसाखी खुद हीं हो, 
और तुम्हे पता भी है कि तुम्हे अपने पैरो से हीं चलना है , यात्रा तुम्हे हीं चलकर पार करनी है, बुद्ध ने तो बस दीशा दिखलाइ है !
                     ◆ अत्त दीपो भव ! ◆
तुम्हे अपना दीपक खुद ही बनना है , रोशनी खुद ही जलानी है, बुद्ध ने तो बस प्रेरणा प्राण दी है !! 
तुममें भी बुद्ध होने कि क्षमता है , वीणा , संगीत , आनंद, प्यार सब तुम्हारे भीतर हीं है , उसे कहीं बाहर ढूंढना व्यर्थ है, तुम्हे अपनी वीणा अपने भीतर हीं खोजनी है, संगीत अपने अंदर हीं बजाना है... बुद्ध पुरूषों जैसा ध्यान-साधना की इच्छा प्रबल रखनी है !!!
 अगर बुद्ध को मन से ध्यान किया तो मन खुद हीं निर्मल ओर सुखमय हो जाता है...
 धर्म किताबों में लिखी बातें तो तल्वार और ताकत के ज़ोर पर बदली गई होंगी..इसलिए बुद्ध निर्मल ओर सुखमय हैं, किताबें नहीं !!!...शुरुआत करो....पहले बुद्ध की तरह दिखो ...सभि को प्यार करो, सभि जानवर, सभि पेङ पौधों को प्यार करो, हमेशा सभी के बारे में सोचो,
अपना बोधि बृक्ष खुद हीं ढ़ूढ़ो, पेड़ों के नीचे ध्यान करो,
बुद्ध की तरह हीं उप्वास करो, वही परम ज्ञान देने वाले हैं !!! ......बुद्ध ने कभि ये नहि बोला होगा कि मेरि मूर्ति की पूजा करो, पर उन्हे पता था की वक्त बदलेगा, कलयुग में मौत की राह में संसार , अंत से पहले शायद कोइ अपनी आंखें खोल कर उन्की मूर्ती से कुछ सीख ले...और शायद बच सके ।।।
Pali..
सर्वे बुद्धम भवति !! सर्वे कमले गृहाप्शा !! सर्वे विंद्ति सर्वाणि !! हरिमर्क्षतिं सर्वदा !!!

 

Thanks,

Prabhat Kumar.

Father:Dr.Jagpati Prasad, Mother: Smt. Usha Sinha

Born. 23 March, 1977 in Patna, Bihar, India .

I practiced meditation. Travelled to Bodh Gaya, Nalanda, Rajgir, Pawapuri in 2011, got inspiration and practiced meditation into Buddha for six lonely years. Fasted for 45 days(2012). Got Enlightenment/Nibbana through Buddh(2015). Returned back to normal life and now spreading my knowledge.

Present Address:

Flat 2, Fortune 12, Akurdi, Pradhikaran, Pune, Maharashtra, India. PIN: 411057

PH: +91 9527565518 / +91 9158739977

Email: Prabhat_mandirwar@yahoo.com


Please go through this webpage sincerely, if you really want to save life on Earth ....http://gomorya.com/w4.htm


छ: बुदधायान ज्ञान,जो आपकी ज़िंदगी हमेशा के लिये बदल देगा ।
सभि को पयार करें, सभि जानवर, सभि पेङ पौधों को , हमेशा सभी के बारे में सोचें ।।
अपना बोधि बृक्ष ढूढें, उसके नीचे धयान करें ।।
बुदध की तरह दिखें , उनकी तरह व्रत करें, वही परम ज्ञान देने वाले हैं , सोचें बुदध ४७७००००० योजना बङे हैं और आप उनके चरणों मे चींटी के समान ।।।
तिपीतक पढें , संघ में योगदान करें।।

बुद्ध ने कभि ये नहि बोला होगा कि मेरि मूरती की पूजा करो, उन्हे पता था, वक्त बदलेगा, कलयुग में मौत की राह में संसार , अंत से पहले शायद कोइ अपना आंख खोल कर उन्की मूरती से कुछ सीख ले...और बच सके ।।।

 

केशम् ददाति सह्श्रारा !!
मलकन्ठे ईड्मणिशुद्धते !!!
पिंग्लाअज्ने कुण्डलारा !!
चक्रपाणिम दर्षेतिह्रद्ये !!!
सर्पेमूले स्वधिस्थाने !!
सर्व देवो जाग्रिते !!!

~प्रभात~